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गुजरात के दिग्गज आदिवासी नेता अनंत पटेल को भारी मतों से हराकर धवलभाई पटेल ने बनाया कीर्तिमान

भाजपा के अंदरूनी विरोध के बावजूद धवलभाई पटेल ने  210704 वोटों के भारी अंतर से हराकर धवलभाई ने रचा इतिहास, 
वलसाड, डांग, वांसदा, धरमपुर, कपराडा, पारडी व उमरगाम विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के धवलभाई पटेल को मिले सबसे ज्यादा वोट, 
श्यामजी मिश्रा 
वलसाड जिला । वलसाड-डांग लोकसभा सीट के लिए कहा जाता है कि जो पार्टी यह सीट जीतती है वह केंद्र में अपनी सरकार बनाती है। हालांकि, राजनीतिक पंडित संभावना जता रहे थे कि यह सिलसिला इस बार टूट सकता है। लोकसभा चुनाव 2024 में हर पार्टी का आकलन कर रहे राजनीतिक पंडितों का मानना ​​था कि इस चुनाव में वलसाड-डांग लोकसभा सीट पर गुजरात के दिग्गज आदिवासी नेता व कांग्रेस उम्मीदवार अनंत पटेल और भाजपा उम्मीदवार धवलभाई पटेल के बीच कांटें की लड़ाई होगी। इसके अलावा राजनीतिक पंडितों का यह भी कहना था कि इस बार स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा लेटर बॉम्ब के जरिए भाजपा उम्मीदवार धवलभाई पटेल का बहुत विरोध किया जा रहा है। स्थानीय भाजपा नेताओं के विरोध के कारण भाजपा उम्मीदवार धवलभाई पटेल को हार का सामना करना पड़ सकता है। परंतु भाजपा उम्मीदवार धवलभाई पटेल ने इन सब बातों पर न उलझकर उन्होंने अपने कार्यकताओं के साथ मिलकर चुनाव प्रचार में लगाया।
उन्होंने आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र डांग, वांसदा, धरमपुर व कपराडा जैसे विधानसभाओं में दिन-रात प्रचार-प्रसार किया और उन्होेंने केंद्र सरकार की योजनाओं तथा अपने बारे में मतदाताओं को बताया। इसी तरह वलसाड, पारडी व उमरगाम विधानसभा क्षेत्रों में जमकर प्रचार-प्रसार किया। इसके अलावा सोशल मीडिया तथा धवल के नाम से गेम विकसित कर सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार प्रसार किया, जो यह गेम काफी चर्चा का विषय बन गया  और युवा मतदाताओं को बहुत आकर्षित किया। यहां तक कि इस धवल नामक गेम को नेशनल मीडिया में बहुत दिखाया गया। बहुत कम समय में धवलभाई पटेल ने वलसाड-डांग लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं के दिलों में अपनी घुसपैठ बनाई। वहीं  सभी राजनीतिक पंडितों के आकलन को झुठलाते हुए धवलभाई पटेल ने गुजरात के दिग्गज आदिवासी नेता व कांग्रेस उम्मीदवार अनंत पटेल को 210704 वोटों के बड़े अंतर से हराया और धवलभाई पटेल जीतने में कामयाब हो गए।
वलसाड जिला का अपने आप में एक आकर्षक इतिहास रहा है:- 
 गुजरात के दक्षिण छोर पर स्थित  वलसाड जिला क्षेत्रफल की दृष्टी से काफी बड़ा है। आद्यौगिक नगरी से विख्यात वापी शहर भी इसी जिले का हिस्सा है। जहां कितने ही लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध कराता यह जिला महाराष्ट्र के 2 प्रमुख जिलों ठाणे और नाशिक से सटा होने, लंबे विस्तार में फैले हरित वादियां, निसर्ग प्रेमियों के लिए स्वर्ग की अनुभूति कराता, भारी मात्रा में बसे वनवासी समुदाय और अन्य भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह जिला मायने रखता इस जिले का अपने आप में बहुत ही आकर्षक इतिहास रहा हैं । भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. मोरारजी देसाई की जन्मस्थली वलसाड जिला ही है। 70 के दशक में तेजी से विकसित इस प्रदेश में 20 वीं सदी आते आते थोड़ी फीकी पड़ गई। हालात चाहे जो भी रहे हों, लेकिन जिस तरह से वलसाड ने अपनी उपलब्धि 70 के दशक में स्थापित की थी, वो दिन दूर नहीं था कि यह जिला देश में सर्वाधिक तेजी से उभरा हुआ सबके सामनें आया होता।
कहते हैं न कि इतिहास खुद को दोहराता है, अब जिला के लोगों की आस अब बढ़ गई हैं। वलसाड – डांग लोकसभा क्षेत्र से भारी बहुमत से जीते धवलभाई पटेल इस जिले को दोबारा खोई हुई विरासत दिलाने में मददगार हो सकते हैं। वलसाड लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने इस बार इस संसदीय क्षेत्र में पढ़े लिखे, तेज तर्रार, आई टी इंजीनियर ,देश विदेशों में नौकरी कर चुके तथा भाजपा की पकड़  सोशल मीडिया के माध्यम से करोड़ों लोगों तक पहुंचाने वाले नवनिर्वाचित सांसद धवल पटेल पर भरोसा जताया है। इस बार धवलभाई पटेल को डांग, वांसदा, धरमपुर व कपराडा विधानसभा से आदिवासी मतदाताओं का भरपूर समर्थन व प्यार मिला है, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार गुजरात के दिग्गज आदिवासी नेता को आदिवासी मतदाताओं ने ही एक तरह से नकार दिया है। इस बार कांग्रेस उम्मीदवार व गुजरात के दिग्गज आदिवासी नेता अनंत पटेल ने आम आदमी पार्टी के मतों को भी पाकर कुछ खास बढ़त नहीं बना पाये। जबकि वहीं भाजपा के धवलभाई पटेल ने पार्टी के अंतर्विरोध के बावजूद वलसाड लोकसभा सीट पर दो लाख दस हजार सात सौ चार मतों के भारी अंतर से अपने विरोधी कांग्रेस उम्मीदवार व गुजरात के दिग्गज आदिवासी नेता अनंत पटेल को परास्त कर दिया।
वलसाड-डांग लोकसभा के सीट पर बहुत जांच परख कर इस हीरे पर बाजी लगाई थी भाजपा:- 
 नवनिर्वाचित सांसद धवलभाई पटेल की बात करें तो क्यों भाजपा ने उन्हें लोकसभा का उम्मीदवार बनाया था ? क्योंकि लाइम लाइट से दूर धवलभाई पटेल ने अपनी पहचान भाजपा आलाकमान पर सीधे बनाई है। भाजपा आलाकमान ने भी  बहुत जांच परख कर इस हीरे पर बाजी लगाई थी, जो कि धवलभाई पटेल ने सौ प्रतिशत रिजल्ट देकर व भारी बहुमत से जीतकर आलाकमान को तोहफा दे दिया है । नवनिर्वाचित सांसद धवलभाई पटेल गुजरात में धोडिया पटेल एसटी समुदाय के वरिष्ठ नेता 28 अप्रैल 1986 को जन्में, बेहद सुलझे हुए, वासंदा के मूल निवासी एनआईटी सूरत (2008) से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीटेक और सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी से एमबीए मार्केटिंग (2010) तथा  एमबीए स्नातक किया है।
 नवनिर्वाचित सांसद धवलभाई पटेल ने इसके पहले कई मल्टीनेशनल कंपनियां जैसे कि आईबीएम, एक्सेंचर स्ट्रैटेजी और कैपजेमिनी जैसी वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियों में वरिष्ठ प्रबंधन पदों पर 12 वर्ष का कार्य अनुभव भी है। जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया में कार्य करने का अनुभव भी शामिल है। इसके अलावा सार्वजनिक नीति, अर्थव्यवस्था, राजनीति और साइबर सुरक्षा पर 200 से अधिक लेखों के स्तंभकार, लगभग 200 पत्रिकाओं, सोशल मीडिया प्लेटफार्म तथा 2 प्रमुख पुस्तकों को लिखने वाले जिसमें ” मोदी विथ ट्राइबल” और “75 ट्राइबल फ्रीडम फाइटर ऑफ इंडिया ” का समावेश है।
नवनिर्वाचित सांसद धवलभाई पटेल की राजनीतिक सफर:- 
 नवनिर्वाचित सांसद धवलभाई पटेल के राजनीति की बात करें तो भाजपा जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रभारी जुलाई 2021 से अब तक बने हुए हैं। वहीं वर्तमान में  गोवा, दादरा नगर हवेली, दमन और दीव के भाजपा एसटी मोर्चा संगठन प्रभारी भी हैं। सामुदायिक मुद्दों में सक्रिय रुचि लेते हुए, लगभग 15 वर्षों तक दक्षिण गुजरात क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के लिए लगातार काम किया। राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रभारी भाजपा एसटी मोर्चा रहते हुए उन्होंने मोर्चा के लिए 29 प्रदेश सोशल मीडिया संयोजक और 550 जिला सोशल मीडिया संयोजक और सह-संयोजकों की नियुक्ति की। जिसका नतीजा यह हुआ कि प्रति माह मिलियन से अधिक पहुंच वाले सभी दलों के मोर्चों में सबसे आगे, आज एसटी मोर्चा भाजपा आईटी सेल द्वारा किए गए ऑडिट में नंबर 1 रैंकिंग पर है। इतना ही नहीं भाजपा अध्यक्ष पद की उम्मीदवार महामहिम  द्रौपदी मुर्मू के लिए राष्ट्रपति चुनाव के लिए अंत से अंत तक 360-डिग्री डिजिटल अभियान चलाया था। इंदौर सोशल मीडिया मीट ने भाजपा के लिए एक रिकॉर्ड बनाया जहां 500 से अधिक प्रभावशाली लोगों की सोशल मीडिया पर फॉलोइंग लगभग 16 करोड़ से अधिक थी। इस सोशल मीडिया मीट ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी को भारी जीत दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाई। नवनिर्वाचित सांसद धवलभाई पटेल के व्यापक अभियान का ही नतीजा था कि गुजरात विधानसभा की 27 आदिवासी आरक्षित सीटों को कवर किया और प्रचार किया जिसमें आजादी के बाद पहली बार बीजेपी ने गुजरात की 27 आदिवासी आरक्षित सीटों में से 23 पर जीत हासिल की। जिससे आलाकमान का भरोसा धवलभाई पटेल पर बढ़ता गया और उनके कार्य कौशल का इनाम वलसाड जैसी अनुसूचित जनजाति लोकसभा सीट पर सांसद बनने का मौका दिया।

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