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खिचड़ी घोटाले की शिकायत करने वाले चोर-चोर मौसेरे भाई ही मिलकर खा गए थे खिचड़ी

आज भारत जैसे सोने की चिड़िया कहलाने वाले देश में भ्रष्टाचार फैला रहा है अपनी जड़ें:- 
श्यामजी मिश्रा 
मुंबई । जब कोई व्यक्ति न्याय व्यवस्था के मान्य नियमों के विरूद्ध जाकर अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए गलत आचरण करने लगता है तो वह व्यक्ति भ्रष्टाचारी कहलाता है। आज भारत जैसे सोने की चिड़िया कहलाने वाले देश में भ्रष्टाचार अपनी जड़े फैला रहा है। आज भारत में ऐसे कई व्यक्ति मौजूद हैं जो भ्रष्टाचारी है। आज पूरी दुनिया में भारत भ्रष्टाचार के मामले में 94वें स्थान पर है। वर्तमान समय में भ्रष्टाचार की मूल जड़ नेता ही हैं चाहे वह किसी भी पार्टी का क्यों न हो। स्वार्थ और असमानता, आर्थिक, सामाजिक या सम्मान, पद -प्रतिष्ठा के कारण भी व्यक्ति अपने आपको भ्रष्ट बना लेता है। हीनता और ईर्ष्या की भावना से शिकार हुआ व्यक्ति भ्रष्टाचार को अपनाने के लिए विवश हो जाता है। साथ ही रिश्वतखोरी, भाई-भतीजावाद आदि भी भ्रष्टाचार को जन्म देते हैं। भ्रष्टाचार एक बीमारी की तरह है। आज भारत देश में भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा है। इसकी जड़े तेजी से फैल रही है। यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया तो यह पूरे देश को अपनी चपेट में ले लेगा। भ्रष्टाचार का प्रभाव अत्यंत व्यापक है। जीवन का कोई भी क्षेत्र इसके प्रभाव से मुक्त नहीं है। यदि हम इस वर्ष की ही बात करें तो ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जो कि भ्रष्टाचार के बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं। मुंबई में कोरोना काल के दौरान ऐसे कई भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं और उसी में से एक प्रमुख खिलाड़ी घोटाला भी है जो मुंबई में लोकसभा चुनाव के दौरान खिचड़ी घोटाला फिर सामने आया। मुंबई में उत्तर पश्चिम जिला लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े अमूल कीर्तिकर के खिलाफ खिचड़ी घोटाला का आरोप लगाकर संजय निरूपम ने अमूल कीर्तिकर को खिचड़ी चोर कहकर जमकर हंगामा किया, परंतु उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा और कांग्रेस से उन्हें बाहर कर दिया गया। इसका मतलब यह हुआ कि जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठायेगा, उसको नाजायज ठहरा दिया जायेगा और उसकी आवाज़ बंद कर दी जायेगी। परंतु जो सरकार में रहकर जमकर भ्रष्टाचार कर रहा होता है तो उसे प्रमोट किया जाता है। ऐसा नहीं है कि खिचड़ी घोटाले का किसी ने शिकायत नहीं की थी, कई लोगों ने की थी। उसमें से मुंबई भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के करीबियों में भाजपा का एक पूर्व नगरसेवक ने भी खिलाड़ी घोटाले की शिकायत की थी, जो बाद में सभी ने मिलकर खिचड़ी बनाई और खाई। सूत्रों के अनुसार उस दौरान सभी शिकायत कर्ताओं के बैंक एकाउंट में सीधे पैसे ट्रांसफर किए गए। परंतु यह जांच में ही पता चल सकता है कि पैसे ट्रांसफर किए गए थे या नहीं। वैसे भी अगर ईमानदारी से जांच की जाये तो कई बड़े लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। परंतु सवाल यह उठता है कि जब सैंया भये कोतवाल तो जांच करेगा कौन ? भला अपने पांव पर कुल्हाड़ी कौन मारता है भाई। वैसे देखा जाए तो मुंबई में नेता एक दूसरे पर कीचड़ जरूर उछालते हैं, लेकिन वह कीचड़ उनके मुंह पर भी गिरता है। एक तरह से यह कहा जा सकता है कि चोर-चोर मौसेरे भाई। वैसे अगर कोई नेता अपने आका का चरण वंदना कर आगे बढ़ जाता है या उसे सत्ता प्राप्त हो जाता है, तो वह मद में चूर हो जाता है। वह अपने आपको आका से कम नहीं समझता। उसका सिर्फ एक ही टार्गेट रहता है कि इतना धन इकठ्ठा कर लूं उस धन के बलबूते भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को कुचला जा सके।
आका के इस्तीफे की पेशकश से परेशान है भ्रष्टाचारी भाजपा नेता, अब जांच का सता रहा है डर:-
 मुंबई का एक भाजपा नेता जो अपने आका के इस्तीफे की पेशकश से आजकल बहुत परेशान है। एक तरह से देखा जाए तो उनका परेशान होना भी लाजिमी है। क्योंकि उसने अपने आका के नाम का भरपूर फायदा उठाकर जमकर भ्रष्टाचार किया है। एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उक्त नेता के भाई ने नोटबंदी के दौरान दूसरे के एकाउंट में दो नंबरी के नोटो को जमा कर एक नंबरी करके करोड़ों की कमाई की थी। इस मामले का भंडाफोड़ तब हुआ था जब उक्त व्यक्ति को इनकम टैक्स की नोटिस दी गई थी। तब उक्त नेता ने अपने आका की चरणवंदना कर इस मामले को दबवा दिया था। इस नेता की भ्रष्टाचार कहानी यहीं खतम नहीं होती, इसने मुंबई महानगरपालिका के करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के मामले उठाये और मीडिया में बाकायदा प्रकाशित करवाया, परंतु उसके बाद दुबारा मीडिया में भी नहीं आया और न इस मामले में कोई कार्रवाई की गई। अब क्यों नहीं की गई होगी तो आप समझ ही गए होंगे कि यहां भी करोड़ों का बंदरबांट हुआ होगा। ऐसे ही कई बड़े-बड़े अवैधनिर्माणों की भी शिकायत की गई थी, परंतु उन अवैधनिर्माणों को नहीं तोड़ा गया। बल्कि उन अवैधनिर्माणों को तोड़ा गया जिसने इसे चवन्नी भी नहीं दी थी। इसके अलावा बिल्डरों में भी इसकी अच्छी खासी घुसपैठ है, एक तरह से देखा जाए तो चोर चोर मौसेरे भाई की तरह जितने भी भ्रष्टाचारी बिल्डर हैं उनका आजकल मशीहा बना हुआ है। अगर स्थानीय लोग व कुछ पत्रकार उक्त बिल्डर के खिलाफ आवाज उठाता है तो यह भ्रष्टाचारी नेता अपने आका का धौंस जमाकर पुलिस द्वारा फर्जी केस में उन्हें अंदर करवा देता है। यहां तक इस नेता ने कई पेट्रोल पंप ऐसे जगहों पर पास करवा लिया है, जहां पर कानून पेट्रोल पंप पास नहीं हो सकता है। ऐसे कई तरह के भ्रष्टाचार करके इस नेता ने करोड़ों रुपयों की अवैध कमाई किया हुआ है जो कुछ बिल्डरों के साथ सांठगांठ कर नंबर दो को नंबर एक कर कथित बिल्डर भी बन गया है। अब उसे यही भय सता रहा है कि अगर उसके आका का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया या सत्ता से बाहर हो गए तो भ्रष्टाचार की जांच से बचायेगा कौन ? अगर भाजपा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ही ऐसे भ्रष्टाचारी नेताओं का साथ दिया तो वह दिन दूर नहीं जब भाजपा का भी कांग्रेस पार्टी की तरह जैसी स्थिति हो जायेगी। इन्हीं भ्रष्टाचारी नेताओं के अहंकार और घमंडी रवैए के कारण ही मुंबई में लोकसभा चुनाव के दौरान कोई अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। अगर ऐसे नेताओं को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया गया तो आने वाले समय में मुंबई महानगरपालिका चुनाव व विधानसभा चुनाव में मुंह की खानी पड़ेगी। परंतु दुर्भाग्य यह है कि भ्रष्टाचार व्यक्ति रिश्वत के मामले में पकड़ा जाता है और रिश्वत देकर ही छूट जाता है।

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