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सरकार आदिवासियों को केंद्र में रखकर उनके विकास और अच्छे स्वास्थ्य के लिए काम कर रही है:- सांसद धवलभाई पटेल

प्रधानमंत्री नरेंद्रभाई मोदी आदिवासियों में बढ़ती सिकल सेल बीमारी को लेकर थे चिंतित, 
प्रधानमंत्री ने शुरू किया था सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन कार्यक्रम 2047, 
 वर्ष 2006 में स्वास्थ्य विभाग में एक अलग सिकल सेल उन्मूलन विभाग भी किया गया शुरू, 
धरमपुर में “विश्व सिकल सेल दिवस” ​​का जिला स्तरीय समारोह का किया गया आयोजन, 
 सिकल सेल स्क्रीनिंग के मेगा शिविर में लगभग 5000 लोगों की की गई सिकल सेल की नि:शुल्क जांच, 
श्यामजी मिश्रा 
 वलसाड जिला। संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने 2008 में पहली बार विश्व सिकल सेल दिवस मनाने की शुरुआत की थी। ताकि इस बीमारी को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में पहचान मिल सके। साथ ही इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़े सके। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक रूप से 19 जून को विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस के रूप में मनाना शुरू कर दिया। वहीं देश भर में वर्ष 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को खत्म करने के उद्देश्य से 19 जून 2024 को विश्व सिकल सेल दिवस मनाया गया। इसके तहत वलसाड जिला के धरमपुर स्थित एसएमएसएम हाई स्कूल में वलसाड जिला पंचायत अध्यक्ष मनहरभाई पटेल और सांसद धवल पटेल की उपस्थिति में सिकल सेल दिवस मनाया गया। जिसमें सिकल सेल रोग के रोगियों के लिए एक मेगा शिविर का आयोजन किया गया और लगभग 5000 लोगों की जांच की गई। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मनहर भाई पटेल ने कहा कि सरकार वर्ष 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को खत्म करने के लिए अनेक कार्य कर रही है। वहीं सिकल सेल रोग के लिए आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं। जबकि जरूरत के समय मुफ्त इलाज और मुफ्त रक्त भी दिया जाता है।
कार्यक्रम में सांसद धवल पटेल ने कहा कि सरकार आदिवासियों को केंद्र में रखकर उनके विकास और अच्छे स्वास्थ्य के लिए काम कर रही है। वर्ष 2001 के बाद से पांच साल के बजट में आदिवासियों के लिए बजट प्रावधानों की तुलना में कई गुना वृद्धि की गई है। वर्ष 2001 के बाद आदिवासी विकास के लिए बजट में 15000 करोड़, फिर 45000 करोड़ और वर्तमान बजट में 1 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसलिए सरकार हर साल आदिवासियों के विकास के लिए विकास कार्य करने जा रही है।
साथ ही सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी आदिवासियों में बढ़ती सिकल सेल बीमारी को लेकर चिंतित थे, इसीलिए प्रधानमंत्री ने पिछले साल देश के 17 राज्यों में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन कार्यक्रम 2047 की शुरुआत की थी। वर्ष 2006 में स्वास्थ्य विभाग में एक अलग सिकल सेल उन्मूलन विभाग भी शुरू किया गया। तो अब सिकल सेल स्क्रीनिंग-मॉनिटरिंग भी शुरू हो गई है और निःशुल्क निदान भी किया जाता है। चूंकि सिकल सेल आयुष्यमान योजना के अंतर्गत आता है, इसलिए मुफ्त इलाज भी उपलब्ध है। पहले सिकल सेल के मरीजों को 500/- रूपये प्रतिमाह मिलते थे, जिसे इस सरकार ने पांच गुना बढ़ाकर 2500/- रूपये प्रतिमाह कर दिया है। सिकल सेल उन्मूलन अभियान के बारे में बोलते हुए सांसद ने कहा कि 19 जून से 03 जुलाई 2024 तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य देशभर के 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग करना है। जिसमें एक करोड़ से ज्यादा लोगों की अब तक स्क्रीनिंग की जा चुकी है। वलसाड जिला में भी अब तक 12,20,598 लोगों की जांच की गई है। जिसमें 2573 सिकल सेल रोगी पाए गए हैं और 59,816 सिकल सेल वाहक दर्ज किए गए हैं। वहीं सांसद धवलभाई पटेल ने अपील करते हुए कहा कि सिकल सेल को पूरी तरह से खत्म करना है, इसलिए हर युवा को इस बीमारी के बारे में अधिक से अधिक जानकारी फैलानी चाहिए और लोगों को इस बीमारी की गंभीरता के बारे में जागरूक करना चाहिए और समय पर जांच और निगरानी करानी चाहिए।
 इस कार्यक्रम में सिकल सेल शोधकर्ता पद्मश्री डाॅ. यज़्दी इटालिया ने लोगों को सिकल सेल रोग, सिकल सेल रोग के लक्षण, निदान, उपचार और रोगियों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जागरूक किया। सिकल सेल रोग एक आनुवंशिक रोग है। जो आदिवासी लोगों में व्यापक रूप से देखा जाता है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी के कारण सिकल सेल रोगी का जीवन सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक कठिन होता है। इसके अलावा, इस शिविर में सिकल सेल लक्षण वाले लोगों को शादी से पहले विशेष रूप से सूचित किया गया ताकि यह बीमारी अगली पीढ़ी में न फैले। इस आयोजित शिविर के उपरांत एन.सी.डी. स्क्रीनिंग, टीबी स्क्रीनिंग और पीएमजेएवाई कार्ड जारी करने की भी व्यवस्था की गई थी। उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने सिकल सेल रोगियों को सिकल सेल प्रतीकात्मक कार्ड, जिला के 2573 रोगियों की ओर से 2500/- रूपये की सहायता चेक तथा सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण के पार्षदों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर धरमपुर विधायक अरविंदभाई पटेल, उमरगाम विधायक रमणलाल पाटकर और राज्य एपिडेमिक अधिकारी डॉ. स्वप्निल शाह ने सिकल सेल रोग की गंभीरता, रोग निदान की आवश्यकता और रोग उन्मूलन अभियान के बारे में प्रासंगिक भाषण दिया। सिकल सेल उन्मूलन के लिए 19 जून से 3 जुलाई तक चलने वाले इस अभियान में जिला के ज्यादा से ज्यादा आदिवासी समाज के लोग भाग लेकर सिकलसेल की जांच कराएं, जिससे आनेवाली पीढ़ी में यह रोग न फैले, इसके लिए मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. विपुल गामीत द्वारा अनुरोध किया गया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी अनुसूया झा, जिला विकास अधिकारी अतिराज चपलोत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष ब्रिजना पटेल, सार्वजनिक स्वास्थ्य समिति अध्यक्षा कल्पना पटेल, धरमपुर प्रांत अधिकारी अमित चौधरी, विभागीय उप नियामक आरोग्य डाॅ. ज्योति गुप्ता, तालुका स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जिज्ञेश माहला, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
 सिकल सेल से प्रभावित होते हैं आरसीबी, अनुवांशिक होती है ये बीमारी:-
सिकल सेल खून से जुड़ी एक बीमारी है जो शरीर की लाल रक्त कोशिकाओं (आरसीबी) को प्रभावित करती है। यह बीमारी आमतौर पर पैरेंट्स से बच्चों में वंशानुगत मिलती है। आमतौर पर लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन होता है। लेकिन जिन लोगों को सिकल सेल बीमारी होती है, उनकी लाल रक्त कोशिकाओं में ज्यादातर हीमोग्लोबिन एस होता है, जो कि हीमोग्लोबिन का असामान्य प्रकार है। इस कारण लाल रक्त कोशिकाओं का आकार बदल जाता है और वे सिकल शेप (अर्धचंद्राकार आकार) के बन जाते हैं। चूंकि सिकल के आकार वाली ये लाल रक्त कोशिकाएं छोटी-छोटी रक्त धमनियों से गुजर नहीं पातीं, इसलिए शरीर के उन हिस्सों में बेहद कम खून पहुंचता है। जब शरीर के किसी ऊतक तक सामान्य खून नहीं पहुंचता तो वह हिस्सा क्षतिग्रस्त होने लगता है। इस बीमारी के लक्षण बच्चे के जन्म के 5 या 6 माह बाद से ही दिखने शुरू हो जाते हैं। इस बीमारी के गिरफ्त में आने पर शरीर में दर्द, बैक्टीरियल संक्रमण होना, हाथों और पैरों में सूजन, दृष्टि संबधी समस्याएं, हड्डियों को नुकसान, एनीमिया और प्यूबर्टी या प्रौढ़ता आने में देरी आदि के लक्षण दिखते हैं।

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