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Monday, Feb 6, 2023
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पहली दस्तक – अजय भट्टाचार्य

पहली दस्तक
करीब 9 महीने पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस की घड़ी उतारकर हाथ में कमल थामकर भारतीय जनता पार्टी में भर्ती हुए विजय सिंह मोहिते पाटील घर वापसी की ओर हैं। कल पुणे में वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट की 43वीं वार्षिक आमसभा और पुरस्कार वितरण समारोह में राकांपा सुप्रीमो शरद पवार से 9 महीने बाद मोहिते पाटील ने 15 मिनट बातचीत की। इस समय दोनों नेताओं के बीच वास्तव में क्या चर्चा हुई, इसका कोई विवरण नहीं दिया जा सकता है। जब विजय सिंह मोहित पाटिल वहाँ पहुँचे तब शरद पवार ने उन्हें कुर्सी के सामने बैठने के लिए कहा। दोनों के बीच करीब दो मिनट बातचीत हुई। दूसरी ओर, अजीत पवार और हर्षवर्धन पाटिल के बीच भी लंबी चर्चा हुई है। मोहिते पाटील माढा लोकसभा सीट से सांसद थे। भाजपा में शामिल होने के बाद भी उन्हें इस सीट पर उम्मीदवारी न देकर भाजपा ने रंजीत सिंह नाईक निंबालकर को मैदान में उतारा था। यह भी महत्वपूर्ण है कि विजयसिंह मोहिते पाटील के बेटे रणजीत सिंह मोहिते पाटील ने भी पिता के साथ कदमताल करते हुए राकांपा के राज्यसभा सांसद होते हुए भाजपा में प्रवेश किया था। भाजपा ने लोकसभा और न विधानसभा चुनाव में इन पिता-पुत्र को उम्मीदवारी नहीं दी। हर्षवर्धन पाटील कांग्रेस छोडकर भाजपा में गए थे लेकिन इंदापूर से चुनाव हारने के बाद वापस घर आने के प्रयास में हैं।
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कुंवर चाणक्य
झारखण्ड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता कुंवर रणजीत प्रताप नारायण सिंह उर्फ़ आरपीएन सिंह राजनीतिक रणनीति के चाणक्य बनकर उभरे हैं। कुशीनगर के पड़रौना राजपरिवार में जन्मे आरपीएन सिंह के पिता सीपीएन सिंह को इंदिरा गांधी राजनीति में लेकर आई थीं। सीपीएन सिंह इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में ताकतवर मंत्री माने जाते थे। आरपीएन सिंह ने राज्य कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर उम्मीदवार चुनने में पूरी तरह से स्वायत्ता बरती और स्थानीय मुद्दों के हिसाब से पूरी रणनीति बनाई। उम्मीदवार तय करने में राज्य इकाई को पूरी तरह से स्वतंत्र रखा और गुटबाजी नहीं होने दी। झारखंड विधानसभा चुनाव में पार्टी की ओर से जारी किए गए घोषणापत्र में किए गए वादों पर भी आरपीएन सिंह की भूमिका थी जिसमें जिसमें हर परिवार को नौकरियां, किसानों के लिए कर्ज माफी व रांची में मेट्रो रेल सहित कई वादे किए गए। राज्य में सभी लंबित सरकारी रिक्तियों को छह महीने में भरने, जब तक हर परिवार के एक सदस्य को नौकरी नहीं दी जाती, तब तक एक सदस्य को बेरोजगारी भत्ता देने, अकेली सफर करने वाली महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा, किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने, रांची में मेट्रो, 10 हजार रुपये से कम आय वाले परिवार की लड़कियों को मुफ्त में साइकिल, मॉब लिंचिंग के खिलाफ कड़ा कानून, धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य ढाई हजार रुपये प्रति क्विंटल करने, पेट्रोल व डीजल पर वैट घटाने व हर ग्राम सभा में इंटरनेट सुविधा जैसे दूसरे कई वादे जादू करने के लिए काफी थे।
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नागरिकता वाली बहू
राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर और नागरिकता संशोधन कानून का असर अब वैवाहिक रिश्तों में भी नजर आ रहा है। अपने साले की शादी के लिए जीजा ने कोलकाता के एक अख़बार में विज्ञापन दिया है। जिसमें कहा गया है कि वधू चाहिए, पर उसके पास भारतीय नागरिक होने का सबूत होना चाहिए।
1971 से पहले बहू के परिवार का भारत में रहना अनिवार्य है। विवाह करना है, तो कन्या पक्ष को वर पक्ष को बाकायदा कागजी सबूत दिखाना होगा। वर स्कूल शिक्षक हैं। मुर्शिदाबाद में रहते हैं। हालांकि उनका पैतृक निवास उत्तर 24 परगना के हाबड़ा में है। विज्ञापन में केवल टेलीफोन नंबर छपा है, जो वर के जीजाजी का है, जिनसे संपर्क साधने पर पता चला कि भविष्य में यदि एनआरसी होती है और बहू कोई कागजात दिखा नहीं पाती, तो उसे डिटेंशन सेंटर भेजा जा सकता है। फिर उनके साले का क्या होगा? इसलिए यह शर्त रखी गयी है। यह पूछने पर कि कन्या के पास राशन और आधार कार्ड तो होंगे? उनका कहना है कि इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। सरकार क्या करेगी, पता नहीं. इसलिए 1971 से पहले का रिकार्ड मांगा गया है।
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जोश में शॉटगन
झारखंड विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद बॉलीवुड अभिनेता और नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने जोश में एक के एक कई ट्वीट कर प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी को जमकर चिढ़ाया है। शॉटगन के सभी ट्वीट का सार यह है कि सर (मोदी) चीजें अब आपके लिए काफी मुश्किल हो रही हैं और अब यह साफ देखा जा सकता है। सर हरियाणा में अच्छा प्रदर्शन नहीं करने के बाद महाराष्ट्र में विपक्ष के एक होने से सत्ता आपके पैरों के नीचे से खिसक गई। ऐसा निश्चित रूप से, भारत के ‘असली’ चाणक्य शरद पवार के नेतृत्व की वजह से हुआ। ईवीएम और आपकी सभी चालों के बाद अब झारखंड की बारी और हां, गलत प्रचार प्रसार, कैब, सीएए और एनआरसी की वजह से अराजकता फैल गई। मैंने आपको नहीं बताया सर, ‘फिर ना कहना होशियार ना किया, खबरदार ना किया। देश के लिए कुछ करो, अपने अहंकार, खोखले वादों, दोहराव और विरोधाभासी भाषणों से छुटकारा पाओ।
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