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परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत महाशक्ति की ओर अग्रसर.

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत महाशक्ति की ओर अग्रसर.

परमाणु संयत्र. 

कृष्ण मिश्र ,तारापुर
विज्ञान और तकनीकी में लगातार हो रहे अनुसंधानों से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अपार संभावनाएं देखी जा रही है। तारापुर एटॉमिक रिसर्च सेंटर में परमाणु ऊर्जा को लेकर कृत संकल्प है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ओर से ले कर छोर तक देश को आत्मनिर्भर बनने में प्रयासरत है। इसी कड़ी में सरकार सभी क्षेत्रों में जोर देने के अलावा परमाणु न्यूक्लियर पावर कार्पोरेशन के अंतर्गत परमाणु क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है।
वर्तमान समय में केवल तारापुर परमाणु केंद्र से 2.60 करोड़ यूनिट बिजली निर्मित की जा रही है। ग्लोबल वार्मिग के बढ़ते संकट के बीच परमाणु केंद्र प्रदूषण मुक्त , अविरत और सस्ती बिजली के लिए बेहतर विकल्प साबित होगा।
तारापुर एटॉमिक पावर स्टेशन के निदेशक संजय मुल्कलवार ने बताया की जिस तरह से सरकार द्वारा प्रोत्साहित करते हुए कार्य को अंजाम दिया जा रहा है , देश में अगले 8 वर्षो में बिजली उत्पादन क्षमता 3 गुना बढ़ जाएगी। जो आने वाले समय में अधिक बिजली उत्पादन के साथ प्रदूषण पर नियंत्रण रखने में सहायक साबित होगा।
एनपीसीआईएल के उपमहाप्रबंधक (मीडिया) अमृतेश श्रीवास्तव बताते हैं कि फिलहाल, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में दो-दो यानी कुल छह परमाणु रिएक्टर निर्माणाधीन है। इन परमाणु बिजली घरों का निर्माणकार्य पूरा होने पर बिजली उत्पादन की क्षमता 22,480 मेगावॉट हो जाएगी।
देश में साल 1969 से शुरू हुआ परमाणु बिजली उत्पादन का सफर पूरी गति के साथ विभिन्न राज्यों में स्थापित 22 परमाणु बिजली घरों तक पहुंच चुका है। साल 2031 तक 43 परमाणु ऊर्जा संयत्र देश में 22,480 मेगावॉट बिजली का उत्पादन करने में सक्षम होंगे। इससे देश में बिजली उत्पादन तीन गुना बढ़ जाएगा। फिलहाल, देश में 6780 मेगावॉट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

पत्रकारों को संयत्र की जानकारी देते हुए ,निदेशक

 

भारत का पहला परमाणु बिजली घर फरवरी 1969 में महाराष्ट्र के तारापुर में दो इकाइयों से शुरू हुआ था। जो मुंबई से करीब 100 किलोमीटर दूर है। भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कार्यरत न्यूक्लियर पॉवर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लि. (एनपीसीएल) ने तारापुर परमाणु ऊर्जा संयत्र (टीएपीएस) की शुरूआत के बाद पिछले छह दशक में स्वच्छ और सुरक्षित बिजली का उत्पादन कर देश को अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने में अहम योगदान दिया है।

पत्रकारों से भविष्य की नीतियों को ले कर चर्चा.

टीएपीएस की दो इकाइयों ने रिकॉर्ड बनाया है – संजय मूलकलवार

तारापुर में 210 मेगावॉट की पहली दो ब्वाइलिंग वॉटर रिएक्टर (बीडब्लूआर) इकाई को इसे देश के सबसे पुराने और सबसे शक्तिशाली परमाणु उर्जा संयंत्रों में से एक माना जाता है। तारापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (टीएपीएस) के साइट निदेशक संजय मुलकलवार का कहना हैं कि इन दोनो इकाईयों ने रिकॉर्ड कायम किया है। ये प्लांट 50 साल पूरे होने पर अभी प्रोजेक्ट मोड में है। लेकिन इसमें सुधार कर अगले 12 साल तक बिजली उत्पादन के लिए तैयार किया जा सकता है। जबकि बीडब्लूआर से बिजली उत्पादन की क्षमता 40 साल ही है। इस संयंत्र में कुल 4 इकाइयां हैं जहां प्रतिदिन 1400 मेगावॉट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

देश की पहली महिला नाभिकीय कंट्रोल इंजीनियर हैं अलीगढ़ की मुदिता सिंह।


तारापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (टीएपीएस) में 20 साल से कार्यरत उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की मुदिता सिंह देश की पहली महिला नाभिकीय कंट्रोल इंजीनियर हैं। जिन्होंने टीएपीएस में 3 और 4 रिएक्टर प्लांट का कमीशनिंग किया है। फिलहाल, वह ऩए नाभिकीय अभियंताओं को प्रशिक्षित कर रही हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की छात्रा रही मुदिता सिंह न्यूक्लियर ट्रेनिंग सेंटर में नए इंजीनियरों को प्रशिक्षण देती है जहां भविष्य ऊर्जा जरूरतों के लिए नए नाभिकीय अभियंता तैयार हो रहे है। उनके पति रितेश सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया से हैं जो टीएपीएस में ही सीनियर टेक्नीकल इंजीनियर हैं।

परमाणु संयंत्र

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