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चारकोप में बने श्री बालाजी मंदिर की महिमा है अपार, हुबहू तिरूपति बालाजी की तर्ज पर मंदिर का निर्माण

सुबह 6 से रात 9 बजे तक खुला रहा है मंदिर, 15 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन में होते हैं शामिल, प्रत्येक शनिवार को विशेष भंडारे का आयोजन:-
स्टार मीडिया न्यूज ब्यूरो,
मुंबई। जैसे-जैसे मुंबई शहर का विकास हुआ, वैसे-वैसे भक्ति और आस्था के केंद्र भी बढ़ते चले गए। महानगर में पहले से कई दिव्य मंदिर है, लेकिन बाद भी अनेकों मंदिरों का निर्माण हुआ। उनमें से एक कांदिवली पश्चिम, चारकोप सेक्टर नंबर सात में स्थित हुबहू तिरूपति बालाजी की तर्ज पर श्री बालाजी मंदिर निर्माण किया गया है। इस मंदिर में प्रतिदिन दर्शन के लिए सैंकड़ों श्रद्धालु आते हैं और कई श्रद्धालुओं की मनोकामा भी पूरी हो चुकी है। इसी कारण मंदिर के प्रति लोगों में श्रद्धा बढ़ रही है। मंदिर हर दिन सुबह 6 से रात 9 बजे तक भक्तों के लिए हमेशा खुला रहता हैं। मंदिर में प्रत्येक शनिवार को विशेष भंडारे का आयोजन किया जाता है।
मंदिर के मुख्य पुजारी गुरूनाथ महाराज ने बताया कि तिरूपति मंदिर की भांति है गर्भगृह और भगवान वैंकटेश की मूर्ति है। बगल में माता महालक्ष्मी पद्मावती का मंदिर है। ठीक सामने कुछ फासले पर वट वृक्ष में विराजमान हनुमान मंदिर है। पूर्व दिशा में पाठशाला है। उत्तर दिशा में वास्तु के हिसाब से खाली जगह छोड़ी गई है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को बैठने के लिए अतिरिक्त जगह छोड़ी गई है। मंदिर के पुजारी एंव ट्रस्टी गुरूनाथ महाराज ने बताया कि सन् 2002 में दुर्घटना हो गया था और केएम अस्पताल में भर्ती किया गया। बचने की कोई आशा नहीं थी। उसी दौरान रात में सोते समय तिरूपति बालाजी ने दर्शन दिया और श्री बालाजी का मंदिर बनाने का आदेश दिया था। ठीक होने के बाद मंदिर बनाने का प्रयास शुरू किया। बिजली विभाग में कर्मचारी होने के कारण माली हालत ठीक नहीं थी। फिर भी मंदिर निर्माण के लिए जगह की तलाश शुरू की। 2011 में कांदिवली पश्चिम स्थित चारकोप में हनुमान मंदिर के पास जगह मिली थी। लोगों के सहयोग से श्री बालाजी मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ 7 साल के अंदर बनकर मंदिर तैयार हो गया। आज मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। इस मंदिर की मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से मंदिर में आते है, उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। मंदिर में प्रतिदिन नए-नए वस्त्रों, फूलमाला से श्रृंगार किया जाता है। तरह-तरह के प्रसाद से भोग लगाने के साथ विधिवत पूजा तथा आरती होती है।
हर रोज 2 हजार बच्चों को प्रसाद का वितरण:-
मंदिर के मुख्य ने बताया कि यहां हर रोज पढ़ने वाले दो हजार बच्चों के लिए प्रसाद वितरण हेतु भंडारा होता है जिसका लाभ विद्यार्थियों के अलावा आने वाले सभी भक्त लेते है। परंतु हर दिन से हटकर शनिवार को विशेष भंडारा होता है जिसमें लगभग 15 हजार  से अधिक बच्चे एवं अन्य श्रद्धालु शामिल होते है।

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