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माँ विश्वंभरी तीर्थयात्रा धाम में  चैत्र नवरात्रि के उपलक्ष्य में किया जा रहा है भव्य आयोजन, श्रद्धालुओं की उमड़ पड़ी है भीड़

श्रद्धालुगण मां विश्वंभरी तीर्थ यात्रा धाम की प्रकृति की अनुपम सौंदर्य का दर्शन कर आनंद की अनुभूति कर रहे हैं:-
श्यामजी मिश्रा 
वलसाड जिला । चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर  वलसाड के सभी मंदिरों में इस समय भक्तों की भीड़ देखने को मिल रही है। इसी तरह वलसाड के राबड़ा गांव में स्थित माँ विश्वंभरी तीर्थ यात्रा धाम में भी दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ पड़ी है। श्रद्धालुगण मां विश्वंभरी तीर्थ यात्रा धाम की प्रकृति की अनुपम सौंदर्य का दर्शन कर आनंद की अनुभूति कर रहे हैं ।  वलसाड के राबाडा गांव में हरे-भरे जंगलों और प्रकृति की अनुपम सौंदर्य के बीच धरती पर स्वर्ग का अहसास कराने वाली माँ विश्वभारी तीर्थयात्रा धाम में विश्वविधाता माँ विश्वंभरी माता का दर्शन करने के लिए चैत्र नवरात्रि की शुरुआत से ही दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ पड़ी है। वैसे देखा जाये तो माँ विश्वंभरी तीर्थ यात्रा धाम में हमेशा श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। यहां आने वाले सभी छोटे-बड़े दर्शनार्थियों को इस प्राकृतिक वातावरण में  बहुत शांति और आनंद की अनुभूति होती है। इस धाम में अलौकिक पाठशाला (मंदिर) में माँ विश्वंभरी माता, हिमालय में शिवलिंग, गोकुलधाम में श्रीकृष्ण द्वारा उठाया गया गोवर्धन पर्वत, नंदबाबा की कुटिया, वैकुंठधाम (आदर्श गौशाला) में गीर गाय तथा पंचवटी में श्रीराम और सीतामाता का दर्शन कर भक्तगण धन्य महसूस कर रहे हैं। श्रद्धा के साथ सत्य को स्वीकार कराने जहाँ स्वयं माँ विश्वंभरी चैतन्य स्वरूप विराजमान हैं।
ऐसे धाम की अद्भुत संरचना वास्तव में पृथ्वी पर स्वर्ग का एहसास कराती है और जीवन में सच्ची शांति और खुशी प्राप्त होती है। यह तीर्थयात्रा धाम पूरे विश्व के लिए परमतत्व-माँ विश्वंभरी का दिव्य संदेश है: – “अंधविश्वास त्याग कर घर लौटो और घर को ही मंदिर बनाओ”, मूलभूत भक्ति के राह को बताया गया है और बिना किसी जाति-पाति, ऊंच-नीच, पुरुष-महिला या अमीर-गरीब के भेदभाव के वगैर सनातन वैदिक धर्म की राह व सत्य-असत्य के भेद को बताया गया है। यह दिव्य धाम भवसागर को पार करने अर्थात मोक्ष प्राप्ति के लिए पूरे विश्व में यह दिव्य धाम एक अच्छा प्रकाशस्तंभ रहा है। इस अलौकिक धाम में ज्ञान, भक्ति और कर्म का त्रिवेणी संगम हुआ है जो देखने को मिल रहा है। इस धाम के विशाल परिसर में चारों ओर स्वच्छता है, जो “स्वच्छता वहां प्रभुता” के प्रचलित कहावत को चरितार्थ करा रही है।
 महायज्ञ व भव्य सांस्कृतिक रास गरबा का प्रतिदिन किया जा रहा है कई चैनलों पर सीधा प्रसारण:-
दरेक वर्ष नवरात्रि आती है, जिसमें चैत्र नवरात्रि का बहुत बड़ा महत्व है। माँ विश्वंभरी तीर्थ यात्रा धाम में प्रति वर्ष चैत्र नवरात्रि में महायज्ञ तथा वैदिक परम्परा अनुसार प्राचीन रास गरबा का सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि में प्रतिदिन सुबह श्री याग महायज्ञ हो रहा है। इस यज्ञ को करने से माँ लक्ष्मी की कृपा बरसती रहती है तथा धन, ऐश्वर्य एवं बल-बुद्धि में वृद्धि होती है। यज्ञ से भौतिक स्तर, आध्यात्मिक स्तर पर समस्या हो या स्वास्थ्य संबंधी बहुत सारे रोगों में प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होता है। यज्ञ से वातावरण का जबरदस्त शुद्धिकरण होता है। देश-विदेश से आने वाले अनेक भक्तगण इस श्री याग महायज्ञ का लाभ ले रहे हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक प्रतिदिन रात्रि 9 बजे महाआरती व उसके बाद प्राचीन रास गरबा होता है। बहुत ही सुंदर और मनोहारी रास गरबा को प्रत्यक्ष देखने के लिए  गुजरात व देश- प्रदेश से ही नहीं बल्कि विश्व भर से बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहकर इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद ले रहे हैं।
इसके अलावा महायज्ञ व भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का सीधा प्रसारण youtube पर Maa Vishvambhari Tirthyatra Dham के चैनल पर तथा Starmedianews के YouTube चैनल सहित अनेक टीवी चैनलों पर लाइव प्रसारण किया जा रहा है। इस चैनलों के माध्यम से देश-विदेश के असंख्य लोग घर बैठे ही इस भव्य कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखकर आनंद की अनुभूति कर रहे हैं। इस तीर्थ यात्रा धाम का मूल उद्देश्य यही है कि मूल सनातन भारतीय संस्कृति समग्र विश्व में अनावृत हों और माँ विश्वंभरी की दिव्य क्रांतिकारी विचारधारा तथा दिव्य संदेश “अंधश्रद्धा छोड़कर घर की तरफ पीछे लौटो और घर को ही मंदिर बनाओ” यह दिव्य संदेश विश्व के हर मानव तक पहुंचे, इसलिए इस धाम के संस्थापक श्री महापात्र पुरूषार्थ कर रहे हैं। समग्र विश्व में वैचारिक क्रांति हो, आदर्श कुटुंब व्यवस्था तथा आदर्श समाज व्यवस्था स्थापित हो, इसके लिए यह धाम नि:स्वार्थ भाव से लगातार प्रयत्नशील है। वहीं इस धाम से प्रेरणा लेकर असंख्य लोग अपने घर को घरमंदिर बनाया है। उन घरों में आज आधि-उपाधि-व्याधि व अंधश्रद्धा दूर हो गई है। और लोगों ने व्यक्ति पूजा छोड़कर शक्ति की पूजा करने और अपनाने लगे हैं। ऐसे घर जो घरमंदिर बन गए हैं, और उसमें रहने वाले लोगों में सच्ची समझ भावना आने से परिवार में, अड़ोस-पड़ोस में, समाज में छोटे-बड़े झगड़े, कलह-क्लेश दूर हो गए हैं और उन घरों में लोगों को शांति व स्वर्ग की अनुभूति होने लगी है।
सनातन धर्म में महायज्ञ का बहुत बड़ा महत्व है:- श्री महापात्र
सनातन धर्म में हवन यज्ञ का बहुत महत्व माना गया है। जब भी कोई शुभ कार्य होता है, घरों में हवन जरूर करवाया जाता है। मान्यता है कि हवन-यज्ञ में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के जलने से पर्यावरण की शुद्धि होती है और नुकसान पहुंचाने वाले वायरस-बैक्टीरिया घर से खत्म हो जाते हैं। शास्त्रों में हवन करने के कई सारे फायदे हैं, शास्त्रों के अनुसार अगर आप रोजाना हवन करते हैं तो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे सुख-समृद्धि और कामयाबी के द्वार अपने आप खुलने लगते हैं और मन को आत्मिक शांति मिलती है। हवन करने के लिए सामग्री, शुद्ध घी, आम की लकड़ियां और कपूर जैसी शुभ चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। इनके जलने और धुएं से नकारात्मक शक्तियां घर छोड़कर भाग जाती हैं। साथ ही घर का वातावरण शुद्ध हो जाता है। अगर आप संतान की कामना कर रहे हैं लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद कामयाबी नहीं मिल पा रही है तो आप पीपल की लकड़ी से हफ्ते में एक बार हवन करना शुरू कर दें। मान्यता है कि ऐसा करने से संतान की इच्छा पूरी हो जाती है। वहीं आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों के लिए पलाश की लकड़ी से हवन करना श्रेष्ठ माना जाता है। कहते हैं कि पलाश की लकड़ियों से निकलने वाली भीनी सुगंध से आकर्षित होकर मां लक्ष्मी अपने आप जातक के घर की ओर खिंची चली आती हैं और परिवार पर धन की बरसात कर देती हैं। जो लोग लगातार बीमारियों से जूझ रहे हैं, उन्हें मदार की लकड़ी से हवन करवाना चाहिए। इस लकड़ी से निकलने वाले धुएं से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और वायरस-बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। जिससे मरीज धीरे-धीरे ठीक होने लगते हैं।

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