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जिस पार्टी का उम्मीदवार जीता वलसाड लोकसभा का चुनाव, उसी पार्टी की बनी केंद्र में सरकार,

वलसाड सीट का इतिहास को जानने के लिए मतदाताओं में उत्सुकता जगा देगी:-
श्यामजी मिश्रा /कृष्ण मिश्र “गौतम” 
 वलसाड जिला।  वलसाड जिला। वर्ष 1947 में भारत को ब्रिटिश गुलामी से मुक्ति मिलने के बाद दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश कहे जाने वाले भारत में पहला लोकसभा आम चुनाव वर्ष 1951 में हुआ था, उस समय वलसाड जिला और गुजरात का अस्तित्व नहीं था। जबकि वर्तमान वलसाड, नवसारी और डांग जिला का समावेश सूरत जिला में हुआ था और सूरत का बॉम्बे राज्य में शामिल किया गया था, तब सूरत लोकसभा सीट में दो सामान्य सीटें थीं। आगामी तारीख जब 7 मई 2024 को वलसाड जिला में 18वीं लोकसभा का आम चुनाव होने जा रहा है, तो आजादी के 77 साल के दौरान 17वीं लोकसभा के आम चुनाव की वलसाड लोकसभा सीट से जुड़ी रोचक जानकारी वलसाड सीट का इतिहास को जानने के लिए मतदाताओं में उत्सुकता जगा देगी। वलसाड लोकसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आने के बाद से अब तक एक अजीब परंपरा रही है कि इस सीट से जीतने वाले उम्मीदवार की पार्टी ही दिल्ली में सरकार बनाती रही है। 1957/1962/1967/1971 में कांग्रेस के नानूभाई पटेल विजेता बने और कांग्रेस की सरकार बनी और पंडित जवाहरलाल नेहरू और श्रीमती इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं। इसके बाद कांग्रेस में फूट हो गई और लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने जनता पार्टी का गठन किया गया। जिसमें टूटे हुए कांग्रेसी गुट का नेतृत्व मोरारजी देसाई ने किया। उस वक्त जनता पार्टी के गठन में सभी ग्रुपों ने अहम भूमिका निभाई थी। वर्ष 1977 में लोकसभा चुनाव हुआ। इस लोकसभा चुनाव में वलसाड लोकसभा सीट से जनता पार्टी के टिकट पर नानूभाई पटेल चुनाव लड़े और जीत हासिल की, उसके बाद जनता पार्टी की सरकार बनी और मोरारजी देसाई 81 वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री बने थे। इसके पूर्व कई बार उन्होंने प्रधानमंत्री बनने की कोशिश की परंतु असफल रहे। लेकिन ऐसा नहीं हैं कि मोरारजी प्रधानमंत्री बनने के क़ाबिल नहीं थे। वस्तुत: वह दुर्भाग्यशाली रहे कि वरिष्ठतम नेता होने के बावज़ूद उन्हें पंडित नेहरू और लालबहादुर शास्त्री के निधन के बाद भी प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया। मोरारजी देसाई मार्च 1977 में देश के प्रधानमंत्री बने लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में इनका कार्यकाल पूर्ण नहीं हो पाया। चौधरी चरण सिंह से मतभेदों के चलते उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा। वहीं वर्ष 1980/1984 में हुए लोकसभा चुनावों में वलसाड लोकसभा सीट से कांग्रेस के उत्तमभाई पटेल विजेता बने और कांग्रेस की क्रमशः इंदिरा गांधी और  राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। इसके बाद कांग्रेस के विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अपने सहयोगियों के साथ कांग्रेस से विद्रोह कर दिया और जनता दल बनाने के लिए गुट का जनता पार्टी में विलय कर दिया और 1989 के लोकसभा चुनाव में जनता दल के अर्जुनभाई पटेल वलसाड सीट से जीते और जनता दल ने अन्य राजनीतिक दलों के समर्थन से सरकार बनाई और विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बने। जनता पार्टी, लोकदल और जनमोर्चा के विलय के बावजूद जनता दल पूरी तरह से एकीकृत नहीं हुआ था। विलय करने वाले गुट जनमोर्चा और उसके नेता वीपी सिंह के प्रभुत्व से नाखुश थे। और राजनीतिक दलों में टूट हुई। पतन के बाद जनता दल से अलग हुए गुट ने कांग्रेस पार्टी के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई और वीपी सिंह के स्थान पर चन्द्रशेखर प्रधानमंत्री बने। हालांकि केंद्र सरकार के खिलाफ जासूसी के आरोपों के बीच नई सरकार गिर गई और भारत में मई 1991 में फिर से चुनाव हुए। वहीं वलसाड लोकसभा सीट से कांग्रेस के उत्तमभाई पटेल जीते और केंद्र में पी. वी. नरसिंह राव की सरकार बनी। जिसमें उत्तमभाई पटेल मंत्री भी बने और वलसाड सीट से एकमात्र मंत्री बनने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके बाद वर्ष 1996/1998/1999 के लोकसभा चुनावों में, भाजपा के मणिभाई चौधरी ने वलसाड लोकसभा सीट से जीत हासिल की और अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। जबकि वर्ष 2004 और 2009 में कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार किशनभाई पटेल जीते और एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बनी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। वहीं वर्ष 2014 और 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में वलसाड लोकसभा सीट से डाॅ.  के.  सी.  पटेल विजयी बने और नरेन्द्र भाई मोदी देश के प्रधानमंत्री बने और अभी भी प्रधानमंत्री हैं। अब वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने वलसाड-डांग लोकसभा क्षेत्र से धवल पटेल को मैदान में उतारा है। जबकि इसी सीट से कांग्रेस के अनंत पटेल भी चुनाव मैदान में हैं। अब देखना यह है कि इस सीट की परंपरा कायम रहती है या टूटती है।
वलसाड लोकसभा सीट से भाजपा ने धवल पटेल पर जताया है भरोसा:-
गुजरात के दक्षिण छोर पर स्थित वलसाड जिला क्षेत्रफल की दृष्टी से काफी बड़ा है। आद्यौगिक नगरी से विख्यात वापी शहर भी इसी जिले का हिस्सा है। जहां कितने ही लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध कराता यह जिला महाराष्ट्र के 2 प्रमुख जिलों ठाणे और नाशिक से सटा होने , लंबे विस्तार में फैले हरित वादियां, निसर्ग प्रेमियों के लिए स्वर्ग की अनुभूति कराता , भारी मात्रा में बसे वनवासी समुदाय और अन्य भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह जिला  मायने रखता इस जिले का अपने आप में बहुत ही आकर्षक इतिहास रहा हैं।
 भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. मोरारजी देसाई की जन्मस्थली वलसाड जिला ही है। 70 के दशक में तेजी से विकसित इस प्रदेश में 20 वीं सदी आते आते थोड़ी फीकी पड़ गई। हालात चाहे जो भी रहे हों, लेकिन जिस तरह से वलसाड ने अपनी उपलब्धि 70 के दशक में स्थापित की थी, वो दिन दूर नहीं था कि यह जिला देश में सर्वाधिक तेजी से उभरा हुआ सबके सामनें आया होता। कहते हैं न कि इतिहास खुद को दोहराता है, जिले के लोगों की आस अब बढ़ गई हैं । लोकसभा चुनाव में बीजेपी द्वारा चयनित उम्मीदवार कई मायनों में इस जिले को दोबारा खोई हुई विरासत दिलाने में मददगार हो सकता है। बीजेपी ने इस बार इस संसदीय क्षेत्र में पढ़े लिखे, तेज तर्रार, आई टी इंजीनियर ,देश विदेशों में नौकरी कर चुके तथा बीजेपी की पकड़  सोशल मीडिया के माध्यम से करोड़ों लोगों तक पहुंचाने वाले प्रत्याशी धवल पटेल पर भरोसा जताया है।
सार्वजनिक नीति, अर्थव्यवस्था, राजनीति और साइबर सुरक्षा पर 200 से अधिक लेखों के स्तंभकार है धवल पटेल:-
भाजपा आलाकमान ने बहुत जांच परख कर इस हीरे पर बाजी लगाई है। गुजरात में धोडिया पटेल एसटी समुदाय के वरिष्ठ नेता 28 अप्रैल 1986 को जन्में, बेहद सुलझे हुए, वांसदा के मूल निवासी एनआईटी सूरत (2008) से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीटेक और सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी से एमबीए मार्केटिंग (2010) तथा एमबीए स्नातक किया है। और कई मल्टीनेशनल कंपनियां जैसे कि आईबीएम, एक्सेंचर स्ट्रैटेजी और कैपजेमिनी जैसी वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियों में वरिष्ठ प्रबंधन पदों पर 12 वर्ष का कार्य अनुभव भी है। जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया में कार्य करने का अनुभव भी शामिल है। सार्वजनिक नीति, अर्थव्यवस्था, राजनीति और साइबर सुरक्षा पर 200 से अधिक लेखों के स्तंभकार , लगभग 200 पत्रिकाओं , सोशल मीडिया प्लेटफार्म तथा 2 प्रमुख पुस्तकों को लिखने वाले जिसमें ” मोदी विथ ट्राइबल” और “75 ट्राइबल फ्रीडम फाइटर ऑफ इंडिया ” का समावेश है। राजनीति में बात करें तो भाजपा जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रभारी जुलाई 2021 से अब तक बने हुए हैं। वहीं वर्तमान में  गोवा, दादरा नगर हवेली, दमन और दीव के भाजपा एसटी मोर्चा संगठन प्रभारी भी हैं। सामुदायिक मुद्दों में सक्रिय रुचि लेते हुए, लगभग 15 वर्षों तक दक्षिण गुजरात क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के लिए लगातार काम किया। राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रभारी भाजपा एसटी मोर्चा में रहते हुए उन्होंने मोर्चा के लिए 29 प्रदेश सोशल मीडिया संयोजक और 550 जिला सोशल मीडिया संयोजक और सह-संयोजकों की नियुक्ति की। जिसका नतीजा यह हुआ कि प्रति माह मिलियन से अधिक पहुंच वाले सभी दलों के मोर्चों में सबसे आगे, आज एसटी मोर्चा भाजपा आईटी सेल द्वारा किए गए ऑडिट में नंबर 1 रैंकिंग पर है।
महामहिम द्रौपदी मुर्मू  के लिए 360-डिग्री डिजिटल अभियान चलाया:-
इतना ही नहीं, भाजपा अध्यक्ष पद की उम्मीदवार महामहिम द्रौपदी मुर्मू  के लिए राष्ट्रपति चुनाव के लिए अंत से अंत तक 360-डिग्री डिजिटल अभियान चलाया। इंदौर सोशल मीडिया मीट ने भाजपा के लिए एक रिकॉर्ड बनाया, जहां 500 से अधिक प्रभावशाली लोगों की सोशल मीडिया पर फॉलोइंग 16 करोड़ से अधिक थी। इस सोशल मीडिया मीट ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी को भारी जीत दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाई। धवल पटेल के व्यापक अभियान का ही नतीजा था कि गुजरात विधानसभा की 27 आदिवासी आरक्षित सीटों को कवर करते हुए प्रचार किया। जिसमें आजादी के बाद पहली बार भाजपा ने गुजरात की 27 आदिवासी आरक्षित सीटों में से 23 पर जीत हासिल की। जिससे आलाकमान का भरोसा धवल पटेल पर बढ़ता गया और उनके कार्य कौशल का इनाम वलसाड जैसी सुरक्षित सीट पर सांसद बनने का मौका दिया। इस संसदीय सीट पर बीजेपी प्रत्याशी धवल पटेल का सीधा मुकाबला कांग्रेस के अनंत पटेल से है। हालांकि अनंत पटेल का वनवासी क्षेत्रों में पकड़ मजबूत बताया जा रहा है। लेकिन शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस की उपस्थिति न के बराबर हो चली है। बीजेपी के लिए यह सीट जीतना काफी आसान हो जाता है। साथ ही जिला में खासकर वापी औद्योगिक नगरी को राज्य के वर्तमान कैबिनेट मंत्री कनुभाई देसाई के कार्य कौशलता और जिले के विकास में भरपूर सहयोग देने से जीत की राह बिलकुल आसान हो सकती है।

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