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Wednesday, Feb 8, 2023
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केंद्रीय मंत्री अमित शाह की कार्यशैली से विरोधी पस्त और खेमों में मची खलबली। 

केंद्रीय मंत्री अमित शाह की कार्यशैली से विरोधी पस्त और खेमों में मची खलबली।
कृष्ण कुमार मिश्र ,
   केंद्रीय गृह मंत्री अमित भाई शाह के सितारे चमक रहे हैं। अगले महीने वे 58 वर्ष की सालगिरह मनाएंगे। राजनीतिक विश्लेषक और पंडितों का कहना है कि अपने राजनीतिक कौशल का परिचय अमित शाह ने दिया है, जो इतिहास में कभी भुलाया नही जा सकता। मानो 20 – 20 मैच में एक सुपर स्टार की तरफ से धुआंधार बल्लेबाजी की जा रही हो। वर्तमान में  ममता बनर्जी की भाषा पूरी तरह से बदल चुकी है।
दिल्ली वाले केजरीवाल भी सकते में हैं। विज्ञापनबाजी से तमाम पापों को ढकने ‌वाला ट्रंपकार्ड भी अब नहीं चल पा रहा है। सिनेमा टिकटों की कालाबाजारी से करियर शुरू करने वाले की भी सिट्टी-पिट्टी गुम है। दिल्ली में शराब नीति परिवर्तित कराके बड़ा घोटाला करने वालों की भी गिरफ्तारी शुरू हो चुकी है।
महाराष्ट्र के मंत्री हों या पुलिस अफसर, पिछली ठाकरे सरकार में जिन्होंने काफी आर्थिक भ्रष्टाचार किया था वह जेल पहुंच चुके हैं। अब भी महाराष्ट्र में शिवसेना की सरकार तो है, परंतु अब वह शिवसेना किसी और के नेतृत्व में सरकार बना चुकी है। भाजपा का इस एकनाथ शिंदे सरकार को पूरा समर्थन और साझेदारी है। महाराष्ट्र में ठाकरे सरकार के दौरान जो बड़े-बड़े बातें करते थे, नतीजा सामने है, सभी किसी न किसी अपराध में जेल में चक्की पीस रहे हैं।
पीएफआई से जुड़े सैकड़ों शातिर गिरफ्तार हो चुके हैं, इस संगठन के साथ ही कई अन्य सहयोगी संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाया जा चुका है। विपक्षी खेमों में सन्नाटा है। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जिलाधिकारियों को PFI और उसके सहयोगियों की सभी अचल संपत्तियों की सूची बनाने का निर्देश दिया है। देश में कई महत्वपूर्ण जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। PFI की आधिकारिक वेबसाइट भी बंद हो चुकी है।
 
अमित शाह के द्वारा लिए जा रहे निर्णयों के पीछे ग्रह नक्षत्रों का किस तरह से और कैसा योगदान है, इस पर वरिष्ठ विश्लेषक और ज्योतिषाचार्य  प्रमोद शुक्ला जी का कहना है की  कन्या लग्न और मेष राशि वाली यह कुंडली भाई अमित शाह की ही बताई जाती है। कुंडली के अनुसार ग्रह नक्षत्र इतने प्रबल हैं कि जिस व्यक्ति को कभी तड़ीपार किया गया था वही व्यक्ति आज देश के गृह मंत्रालय में बैठकर बड़े बड़े नेताओं, व्हाइट कालर अपराधियों का काला चिट्ठा खोल रहा है। शुक्ल बताते हैं कि इस कुंडली में कुछ जो बहुत ही खास बातें हैं उसकी चर्चा करना बहुत ही मजेदार होगा। सबसे पहले तो यह  कि इसमें सूर्य और मंगल जैसे अति महत्वपूर्ण ग्रह अपनी नीच राशियों में विराजमान हैं। यह दोनों ही ग्रह नीच के होकर भी कुछ खास योगों के कारण किस तरह से अमित शाह को बहुत ही उच्च स्तर का राजयोग दिला रहे हैं, उसे समझा जा सकता है।
फिलहाल वर्तमान में इस कुंडली में गुरु की महादशा में गुरु की ही अंतर्दशा चल रही है। यह गुरु जो राजयोग बना रहा है उसे पकड़ने में मुझे बहुत समय लग गया। लगातार अमित भाई की कुंडली को देखने पर बताते हैं कि ” इसके पहले जब मैंने अमित भाई की कुंडली की चर्चा की थी तो उसमें कहीं ना कहीं मुझसे चूक हो रही थी, क्योंकि इस राजयोग को मैं पकड़ नहीं पा रहा था। बहुत लंबे समय से मुझे लग रहा था कि पिछले नवंबर महीने में ही राहु की महादशा खत्म होने के साथ ही इस कुंडली के राजयोग समाप्त हो चुके हैं। इस कारण हो सकता है कि उसके बाद अमित शाह की वह अति महत्वपूर्ण भूमिका उस तरह से मोदी सरकार में ना रह जाए जैसी अब तक रही थी। लेकिन वह मेरी चूक थी,, दरअसल वर्तमान में जिस राजयोग का फल उन्हें मिल रहा है उस राजयोग को मैं पकड़ ही नहीं पाया था। आइए मैं आपको बता दूं कि वह कौन सा राजयोग है…??
पाराशर के चार प्रमुख नियमों में से एक यह भी है कि केंद्र का स्वामी यदि त्रिकोण में बैठकर त्रिकोणेश को देख रहा हो तो यह भी बहुत श्रेष्ठ स्तर का राजयोग होता है। इस राजयोग को मैं इसलिए नहीं पकड़ पा रहा था, क्योंकि चौथे और सातवें स्थान का स्वामी गुरु त्रिकोण स्थान में वृष राशि पर बैठा तो है, परंतु उसकी पूर्ण दृष्टि मेरे हिसाब से शुक्र पर नहीं पहुंच रही थी। अर्थात नौवें स्थान के स्वामी शुक्र को गुरु (मुझे लगा कि) नहीं देख पा रहा है, परंतु यह मेरी चूक थी। दरअसल बहुत बारीकी से देखा जाए तो पता चलेगा कि गुरु करीब 1 अंश का ही है और शुक्र लगभग 26 डिग्री का है। इसलिए गुरु की पांचवीं दृष्टि शुक्र पर पूरी तरह से पहुंच रही है,, और यह राजयोग अपने आप में पूरा फल देने में समर्थ हो रहा है। गुरु की यह राजयोग वाली महादशा लगभग 1 वर्ष पहले प्रारंभ हुई परंतु इसमें एक नकारात्मकता भी शामिल है। यह कि गुरु सातवें स्थान का स्वामी होने के कारण स्वास्थ्य के लिए जातक को काफी नकारात्मक प्रभाव भी दे रहा है। इसी कारण पिछले एक साल के दौरान अमित जी का स्वास्थ्य भी काफी ज्यादा प्रभावित रहा है। “
एक और महत्वपूर्ण बात इस कुंडली में यह है कि चलित चार्ट में केतु तीसरे स्थान में और राहु नौवें स्थान में आ गया है। राहु की यहां से पांचवीं दृष्टि लग्न तक पहुंच रही है। तीसरे स्थान में जब केतु होता है तो उस व्यक्ति का तेवर कुछ ऐसा ही होता है जैसा आप अमित भाई में पाते हैं। चाहे वह पत्रकार वार्ता कर रहे हों, या कोई अन्य बैठक अथवा कोई सभा कर रहे हैं। उनके अत्यंत तीखे तेवर से अब यह देश पूरी तरह से वाकिफ हो चुका है। तीसरे घर में बैठे केतु और दूसरे घर अर्थात वाणी स्थान में बैठे सूर्य का भी यह असर है,, और उसमें भी “एक तो तितलौकी, उस पर भी नीम चढ़ी” वाली कहावत तब चरितार्थ हो जाती है, जब  एकादश भाव में बैठा नीच का मंगल अपनी चौथी पूर्ण दृष्टि दूसरे स्थान और सूर्य व बुध पर डालता है। यह सभी ग्रह मिलकर जो असर दे रहे हैं, वह तीखापन शाह के तेवर में और उनकी वाणी पर हर वक्त प्रत्यक्ष रूप से दिखाई पड़ता है।
कूटनीति की परिपक्वता और शत्रुओं पर हमला करने के लिए कौन सा समय उपयुक्त है, उसका चयन करने में उनकी कुंडली में बैठा हुआ गुरु और राहु पूरी तरह से मददगार है। गुरु की पांचवीं दृष्टि भी लग्न पर पड़ रही है और चलित चार्ट में नौवें घर में आ गए राहु की दृष्टि भी कुछ हद तक पहुंच रही है। यह दृष्टियां राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से जातक को बहुत ही परिपक्व बना देती हैं। इसीलिए कहा जाता है कि अमित शाह अगर किसी राज्य में गए हैं तो समझ लीजिए कि वहां पर कोई सरकार गिरने वाली है या नई कोई सरकार बनने वाली है। अब तो लोग मजाक में यह भी कहने लगे हैं कि कहीं ऐसा ना हो कि भविष्य में किसी अन्य देश में सरकार बनानी हो तो विदेशों से भी उनका बुलावा आ जाए।
” वरिष्ठ विश्लेषक और पत्रकार प्रमोद शुक्ल जी ज्योतिष के विद्वान हैं , अंक द्वारा समय समय पर कई भविष्यवाणियां कुंडली को देख के की जाती रही हैं।”

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